प्राचीन काल में भारत में बालों को पोषण देने के लिए लोग सिर में मालिश करते थे। यह मालिश नियमित रूप से की जाती थी। जिससे बालों की जड़ें मजबूत रहें, बाल चमकदार बने, बालों में मालिश के लिए तिल और सरसों का तेल इस्तेमाल किया जाता था। कालिदास ने शाकुंतलम में इसका उल्लेख किया है। वन में रहने वाले लोग अपने बालों में इंगुड़ी के तेल का उपयोग करते थे। सिर में तेल लगाने का एक तरीका होता था, सिर में तेल लगाते वक्त हाथों की गति पर ही सब कुछ टिका होता है। तेल लगाते वक्त सर के अलग-अलग हिस्से पर दबाव भी कम ज्यादा देना होता था, जिससे आराम मिले। सिर में तेल लगाने का एक वैज्ञानिक कारण भी था। सिर में तेल डालने से मस्तिष्क से एंडोर्फिस नामक हारमोंस स्रावित होता है। जिससे सिर में रक्त संचार बेहतर होता है जिससे बाल स्वस्थ रहते थे केश को सुवासित करने के लिए स्त्रियां धूप, अगर तगर एवं चंदन का प्रयोग करती थी। जिससे बालों में भीनी भीनी खुशबू समा जाए और मन प्रसन्न रहे बालों को धोने के लिए उस समय आजकल के समान शैंपू नहीं होता था। अतः बालों को रीठे से धोया जाता था कभी-कभी बालों को धोने के लिए मिट्टी और मठ्ठे का प्रयोग भी किया जाता था।

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