लहुरादेवा

भारतीय सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता में से एक है। कास्य युग के दौरान भी भारत में शहरी सभ्यता थी। एक ही देश में अलग-अलग भागों में कई संस्कृतियाँ एक साथ पनप रहे थीं । जहां सैंधव सभ्यता भारत के पश्चिम में विकसित हुई तो वही देश के अन्य भागों में भी उसके समकक्ष संस्कृतियों का विकास हुआ, जिसका विवरण हमें समय-समय पर पुरातत्व विभाग द्वारा प्राप्त होता रहता है । ऐसा ही एक स्थल उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में लहुरादेवा में है, जो माना जाता है कि 4000 वर्ष प्राचीन सभ्यता से संबंधित है । यह स्थल जिला मुख्यालय बस्ती से 26 किलोमीटर गोरखपुर रोड पर स्थित भुजैनी चौराहे से 5 किलोमीटर की दूरी पर है । लहुरादेवा में एक मंदिर के पास ऊंचा टीला है, जिसको समय माई का टीला कहते हैं जब पुरातत्वविदो ने इस टीले की खुदाई प्रारंभ की तो उन्हें भी यह ज्ञात नहीं था, कि इस टीले में मानव बस्ती के इतने पुराने अवशेष प्राप्त होंगे, यहां की खुदाई में सोना चांदी नहीं उससे भी बहुमूल्य चीजें प्राप्त हुई एन.बी.पी. एरोहेड कंडेंड वेयर प्राप्त हुए।

यह सब सामान 7000 साल पहले का है, अर्थात सैंधव सभ्यता से भी प्राचीन यह काल निर्धारण बीरबल साहनी संस्थान लखनऊ द्वारा आकलित यहां से मिले कोयले की रेडियो कार्बन तिथियों के आधार पर किया गया है । यहां पर धान की खेती के भी अवशेष प्राप्त हुए साथ ही यहां पर सेल खड़ी के मनके भी प्राप्त हुए हैं । इसके अलावा यहां से मिली पूरा सामग्री का सांगोपांग अध्ययन किया जाना अभी बाकी है फिर भी इतना तो साफ है कि लहुरादेवा गंगा घाटी के खेतिहरों का अब तक ज्ञात प्राचीनतम निवास स्थल है । ……………

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Kumud Poorvi

कुमुद इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरा छात्रा हैं। एम.एड. की शैक्षिक योग्यता। अनेक पुस्तको
एवं लेखों का प्रणयन। पर्यावरणीय जागरूकता एवं ग्रामीण क्षेत्र मे गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा
के प्रचार में रत।

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